भारत के खिलाफ शर्मनाक पराजय के बाद भी जनरल आसिम मुनीर को मिला फील्ड मार्शल का रैंक, सरकार के इस फैसले के पीछे छुपे हैं कई राजनीतिक और रणनीतिक मायने
20 मई 2025, नई दिल्ली
हाल ही में भारत के हाथों सैन्य मोर्चे पर करारी हार झेलने के बावजूद पाकिस्तान सरकार ने अपने सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को देश का दूसरा फील्ड मार्शल नियुक्त किया है। यह फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई संघीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया। इससे पहले यह सर्वोच्च सैन्य रैंक केवल जनरल अयूब खान को 1960 के दशक में प्राप्त हुआ था।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुनीर को यह प्रमोशन “ऑपरेशन बनयान-उम-मर्सूस” में दिखाई गई रणनीतिक क्षमता के आधार पर दिया गया है। हालांकि भारत से हालिया पराजय के बाद यह फैसला कई विश्लेषकों को चौंकाने वाला लगा है और इसे लेकर राजनीतिक उद्देश्य की आशंका भी जताई जा रही है।
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जनरल मुनीर का सैन्य करियर बेहद विविधतापूर्ण रहा है। उन्होंने 1986 में ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल मंगला से ग्रेजुएशन किया और फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त किया। वे सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात रहे, मंगला की स्ट्राइक कोर में काम किया और बाद में पाकिस्तान की दोनों प्रमुख खुफिया एजेंसियों — ISI और MI — के प्रमुख भी रहे।
उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि एक साधारण धार्मिक परिवार की रही है, जो भारत के जालंधर से पाकिस्तान के रावलपिंडी आकर बसा था। उनके पिता स्कूल के प्रधानाचार्य और मस्जिद के इमाम थे, जबकि मुनीर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा एक इस्लामिक मदरसे से प्राप्त की, जिसे धार्मिक रूप से काफी रूढ़िवादी माना जाता है।
राजनीतिक और सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह पदोन्नति केवल एक सम्मान नहीं बल्कि सरकार और सेना की आलोचनाओं से ध्यान हटाने की एक रणनीति हो सकती है। इस घोषणा ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या पाकिस्तान किसी नए सैन्य अभियान की तैयारी में है, या फिर यह फैसला सिर्फ प्रतीकात्मक है। आने वाले समय में जनरल मुनीर की भूमिका पर करीबी नज़र रखना अहम होगा।
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