Lowest Rated IMDb Movies: कम स्कोर के बावजूद क्यों बनीं कल्ट फिल्में?

Lowest Rated IMDb Movies: कम स्कोर के बावजूद क्यों बनीं कल्ट फिल्में?

नई दिल्ली: फिल्म देखने के बाद दर्शको का पहला सवाल अक्सर यही होता है कि फिल्म कैसी है? आज के समय में इसका जवाब जानने के लिए लोग IMDb जैसी वेबसाइट्स पर रेटिंग और रिव्यू देखते हैं। किसी फिल्म को अगर 7 या 8 की रेटिंग मिली है, तो उसे अच्छी फिल्म मानने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं 2 या 3 के आसपास का स्कोर देखते ही लोग फिल्म को खराब मान लेते हैं।

लेकिन क्या कम IMDb रेटिंग का मतलब हमेशा यह होता है कि फिल्म पूरी तरह बेकार है? सिनेमा में ऐसी कई फिल्में हैं जिन्हें दर्शकों और आलोचकों ने बेहद कम रेटिंग दी, लेकिन बाद में वे अपने अजीबोगरीब कंटेंट या अनोखे अंदाज की वजह से चर्चा में आ गई। कुछ फिल्मों को लोग आज भी मजाक-मजाक में देखते हैं और उन्हें “So Bad It’s Good” यानी इतनी खराब कि देखने में मजा आए, वाली कैटेगरी में रखते हैं।

आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में, जिन्हें IMDb पर बेहद कम रेटिंग मिली और जिनकी चर्चा आज भी होती है।

IMDb रेटिंग आखिर तय कैसे होती है?

IMDb यानी Internet Movie Database पर फिल्मों को रेटिंग यूजर्स की वोटिंग के आधार पर मिलती है। दर्शक किसी फिल्म को 1 से 10 के बीच स्कोर दे सकते हैं। इन वोट्स के आधार पर फिल्म की एक औसत रेटिंग दिखाई जाती है।

यही वजह है कि IMDb रेटिंग को दर्शकों की राय समझने का एक तरीका माना जाता है। हालांकि इसे फिल्म की अंतिम सच्चाई नहीं कहा जा सकता। किसी फिल्म की रेटिंग समय के साथ बदल सकती है और अलग-अलग दर्शकों की पसंद भी अलग हो सकती है।

कई बार किसी फिल्म को आलोचकों से खराब प्रतिक्रिया मिलती है, लेकिन उसका एक छोटा दर्शक वर्ग उसे पसंद करता है। वहीं कुछ फिल्में ऐसी भी होती हैं जिन्हें बड़ी संख्या में लोग बिल्कुल पसंद नहीं करते।

‘Disaster Movie’ बनी अपनी ही रेटिंग की वजह से चर्चा में

2008 में आई ‘Disaster Movie’ का नाम अक्सर कम रेटिंग वाली फिल्मों की चर्चाओं में लिया जाता है। यह एक पैरोडी कॉमेडी फिल्म थी, जिसमें उस दौर की कई लोकप्रिय फिल्मों और पॉप कल्चर का मजाक उड़ाने की कोशिश की गई थी।

फिल्म का उद्देश्य दर्शकों को हंसाना था, लेकिन इसकी कॉमेडी और कहानी को दर्शकों से खास प्रतिक्रिया नहीं मिली। IMDb पर इसकी रेटिंग लंबे समय से काफी नीचे रही है।

दिलचस्प बात यह है कि फिल्म की खराब प्रतिष्ठा ने ही इसे इंटरनेट पर एक अलग पहचान दे दी। कुछ लोग इसे जानबूझकर दोस्तों के साथ देखते हैं और इसकी कमियों को ही मनोरंजन का हिस्सा मानते हैं।

‘Manos: The Hands of Fate’ आज भी क्यों याद की जाती है?

1966 में रिलीज हुई हॉरर फिल्म ‘Manos: The Hands of Fate’ को भी सिनेमा की सबसे खराब फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म का निर्माण बेहद सीमित बजट में हुआ था और इसकी कहानी, अभिनय, एडिटिंग और तकनीकी गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

फिल्म को रिलीज के समय बड़ी सफलता नहीं मिली। लेकिन वर्षों बाद यह अपनी खराब गुणवत्ता की वजह से एक तरह की कल्ट फिल्म बन गई।

आज कुछ दर्शक इसे गंभीर हॉरर फिल्म की तरह देखने के बजाय मनोरंजन और मजाक के लिए देखते हैं। यही इसकी सबसे बड़ी विडंबना है कि जिस फिल्म को कभी खराब माना गया, वही बाद में लोगों के लिए यादगार बन गई।

‘Birdemic’ के खराब CGI ने बना दिया कल्ट फिल्म

‘Birdemic: Shock and Terror’ भी कम रेटिंग वाली फिल्मों की लिस्ट में अक्सर दिखाई देती है। 2010 में आई इस फिल्म की कहानी पक्षियों के हमले के इर्द-गिर्द घूमती है।

फिल्म का सबसे ज्यादा मजाक इसके विजुअल इफेक्ट्स को लेकर बनाया गया। पक्षियों को दिखाने के लिए इस्तेमाल किए गए CGI और एक्शन सीक्वेंस इतने कमजोर नजर आए कि वे दर्शकों के लिए डरावने होने के बजाय हास्यास्पद बन गए।

लेकिन यही कमी बाद में फिल्म की पहचान बन गई। इंटरनेट पर इसके क्लिप्स और सीन्स को लेकर खूब चर्चा हुई और फिल्म को एक अजीब तरह की लोकप्रियता मिली।

‘Saving Christmas’ भी कम रेटिंग वाली फिल्मों में शामिल

2014 में रिलीज हुई ‘Saving Christmas’ को भी दर्शकों से बेहद खराब प्रतिक्रिया मिली। फिल्म का विषय क्रिसमस और धार्मिक विचारों से जुड़ा था, लेकिन इसकी कहानी और प्रस्तुति को लेकर दर्शकों ने काफी आलोचना की।

IMDb पर इसकी रेटिंग लंबे समय तक बेहद कम रही। फिल्म इस बात का उदाहरण है कि किसी खास संदेश या विचार को पर्दे पर पेश करना और उसे दर्शकों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाना दो अलग बातें हैं।

बॉलीवुड की कम रेटिंग वाली फिल्मों में ‘Deshdrohi’ का नाम

सिर्फ हॉलीवुड ही नहीं, भारतीय सिनेमा में भी ऐसी कई फिल्में हैं जिन्हें IMDb पर बेहद कम रेटिंग मिली। इनमें ‘Deshdrohi’ का नाम अक्सर लिया जाता है।

कम बजट में बनी इस फिल्म में अभिनय और कहानी को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया काफी नकारात्मक रही। IMDb पर फिल्म का स्कोर लंबे समय से बहुत कम रहा है।

हालांकि, समय के साथ ‘Deshdrohi’ का नाम एक अलग तरह की इंटरनेट चर्चा का हिस्सा बन गया। फिल्म के कई सीन और डायलॉग सोशल मीडिया पर मीम्स के जरिए दोबारा सामने आते रहे हैं।

क्या कम IMDb रेटिंग का मतलब खराब फिल्म है?

यह सबसे जरूरी सवाल है। इसका जवाब सीधा नहीं है। IMDb रेटिंग दर्शकों की राय का एक संकेत है, लेकिन इसे किसी फिल्म की गुणवत्ता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। किसी फिल्म को कोई दर्शक 2 स्टार दे सकता है, जबकि दूसरा व्यक्ति उसी फिल्म को मनोरंजक मानकर 7 स्टार दे सकता है।

फिल्में पसंद करने का तरीका हर व्यक्ति का अलग होता है। किसी को गंभीर सिनेमा पसंद है, किसी को मसाला फिल्में, किसी को हॉरर और किसी को ऐसी फिल्मों में मजा आता है जो जानबूझकर या अनजाने में बेहद अजीब लगती हैं।

कई बार कम रेटिंग वाली फिल्में ही दोस्तों के साथ देखने के लिए सबसे ज्यादा मनोरंजक साबित होती हैं।

‘So Bad It’s Good’ फिल्मों का अपना फैन बेस

सिनेमा में ‘So Bad It’s Good’ एक लोकप्रिय टर्म है। इसका इस्तेमाल ऐसी फिल्मों के लिए किया जाता है जो इतनी खराब होती हैं कि उनकी कमियां ही मनोरंजन का कारण बन जाती हैं।

खराब CGI, अजीब डायलॉग, कमजोर अभिनय, अजीब कहानी या असामान्य निर्देशन कभी-कभी फिल्म को लोगों के बीच अलग तरह से लोकप्रिय बना देते हैं।

यही वजह है कि कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बावजूद सालों बाद कल्ट स्टेटस हासिल कर लेती हैं।

बॉक्स ऑफिस और IMDb रेटिंग एक जैसी चीजें नहीं

किसी फिल्म की कम IMDb रेटिंग का मतलब यह भी नहीं है कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह असफल रही होगी। इसी तरह किसी फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन उसकी IMDb रेटिंग को जरूरी नहीं कि ऊंचा बना दे।

दर्शक पैसा खर्च करके फिल्म देख सकते हैं, लेकिन बाद में उसे खराब रेटिंग दे सकते हैं। दूसरी तरफ कोई फिल्म थिएटर में सफल न हो, लेकिन बाद में टीवी, OTT या सोशल मीडिया के जरिए उसे नया दर्शक वर्ग मिल सकता है। यानी बॉक्स ऑफिस और IMDb रेटिंग दोनों अलग-अलग चीजें हैं।

आखिर फिल्म देखने से पहले क्या करें?

किसी फिल्म को सिर्फ उसकी रेटिंग देखकर खारिज करना जरूरी नहीं है। IMDb स्कोर देखने के साथ फिल्म का ट्रेलर, कहानी, रिव्यू और अपनी पसंद को भी ध्यान में रखना चाहिए।

कई बार कम रेटिंग वाली फिल्म आपकी पसंद की हो सकती है और कई बार 8 या 9 रेटिंग वाली फिल्म आपको बिल्कुल पसंद नहीं आएगी। इसलिए IMDb रेटिंग को एक संकेत की तरह देखें, अंतिम फैसला नहीं।

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कम रेटिंग भी बना सकती है फिल्म को यादगार

सिनेमा का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि हर फिल्म का असर हर दर्शक पर एक जैसा नहीं होता। कुछ फिल्में पुरस्कार जीतकर भी समय के साथ भुला दी जाती हैं, जबकि कुछ खराब मानी जाने वाली फिल्में सालों बाद भी लोगों को याद रहती हैं।

‘Disaster Movie’, ‘Birdemic’, ‘Manos: The Hands of Fate’ और ‘Deshdrohi’ जैसी फिल्में इसी बात का उदाहरण हैं।

इन फिल्मों को पसंद करना या नापसंद करना दर्शक की अपनी पसंद है। लेकिन इतना जरूर है कि इनकी कम रेटिंग ने इन्हें पूरी तरह गायब नहीं किया। बल्कि कई मामलों में इनकी खराब प्रतिष्ठा ही इनकी पहचान बन गई।

आखिरकार फिल्म अच्छी है या खराब, इसका फैसला सिर्फ नंबर नहीं करते। कभी-कभी 2 स्टार वाली फिल्म भी दोस्तों के साथ बैठकर देखने पर 10 स्टार जितनी यादगार शाम दे सकती है।

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