योनि स्राव की मात्रा में बदलाव महिलाओं में सामान्य है, पर कई बार इसे बीमारी समझ लिया जाता है।
महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा एक बहुत ही सामान्य लेकिन अक्सर गलत समझा जाने वाला विषय है—योनि से निकलने वाले स्राव की मात्रा में वृद्धि। कई महिलाएं देखती हैं कि महीने के कुछ दिनों में यह स्राव पतला, साफ़ और खिंचाव वाला हो जाता है, ठीक वैसे ही जैसे ‘कच्चे अंडे की सफेदी’ होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि इस तरह के स्राव की अधिकता घबराने की नहीं, बल्कि खुशी की बात है, क्योंकि यह आपके प्रजनन तंत्र (Reproductive System) के पूरी तरह से स्वस्थ होने का संकेत है।
स्राव क्या है और यह क्यों बदलता है?
आपके शरीर से निकलने वाले इस तरल पदार्थ को सर्वाइकल म्यूकस (Cervical Mucus) कहते हैं। यह गर्भाशय ग्रीवा (Cervix)—यानी गर्भाशय के निचले हिस्से—में मौजूद ग्रंथियों द्वारा बनाया जाता है। इसका मुख्य काम योनि और गर्भाशय को साफ़ रखना, नमी देना और बाहरी संक्रमणों से बचाना है।
इस स्राव की मात्रा, रंग और बनावट हर समय एक जैसी नहीं रहती। यह मुख्य रूप से दो हार्मोन—एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन—के स्तर में बदलाव के कारण पूरे मासिक धर्म चक्र के दौरान बदलती रहती है।
स्राव बढ़ने का सबसे बड़ा कारण: ओव्यूलेशन
स्राव के अचानक बढ़ने और ‘अंडे की सफेदी’ जैसा दिखने का सबसे महत्वपूर्ण कारण है ओव्यूलेशन (Ovulation)।
ओव्यूलेशन क्या है: यह वह समय है जब आपके अंडाशय (Ovary) से एक परिपक्व अंडाणु (Egg) बाहर निकलता है और गर्भधारण के लिए तैयार होता है। यह आमतौर पर आपके मासिक धर्म चक्र के मध्य में होता है।
हार्मोन का जादू:
- एस्ट्रोजन का बढ़ना: जैसे ही शरीर ओव्यूलेशन की तैयारी शुरू करता है, एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेज़ी से ऊपर जाता है।
- स्राव को संदेश: एस्ट्रोजन का यह उच्च स्तर गर्भाशय ग्रीवा को ढेर सारा तरल पदार्थ बनाने का आदेश देता है।
- बनावट में बदलाव: यही कारण है कि स्राव अपनी पुरानी चिपचिपी और गाढ़ी अवस्था से बदलकर पतला, पानी जैसा, साफ़ और बहुत खिंचाव वाला हो जाता है।
यह प्रकृति का सबसे बड़ा इशारा है:
यह पतला, साफ़ और प्रचुर स्राव असल में शुक्राणु (Sperm) के लिए एक फास्ट ट्रैक हाईवे जैसा काम करता है।
- यह शुक्राणु को ऊपर गर्भाशय तक आसानी से तैरने में मदद करता है।
- यह उन्हें पोषण देता है।
- यह उन्हें योनि के अंदर के अम्लीय वातावरण (Acidic Environment) से बचाता है।
संक्षेप में, यह स्राव महिला के शरीर के सबसे उपजाऊ (Fertile) होने का एक स्पष्ट और प्राकृतिक संकेत है। स्राव की मात्रा अधिक होने का सीधा मतलब है कि गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक है।
स्राव बढ़ने के अन्य सामान्य कारण
ओव्यूलेशन के अलावा, कुछ और सामान्य स्थितियां हैं जो इस स्राव को बढ़ा सकती हैं:
- यौन उत्तेजना (Arousal): जब कोई महिला उत्तेजित होती है, तो उसके जननांगों में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। इससे योनि के आस-पास की ग्रंथियाँ प्राकृतिक स्नेहक (Lubricant) के रूप में तुरंत और अधिक पतला, साफ़ द्रव छोड़ती हैं, जिससे स्राव की मात्रा बढ़ जाती है।
- गर्भावस्था (Pregnancy): गर्भावस्था के दौरान, शरीर में हार्मोन का स्तर लगातार उच्च बना रहता है। इससे योनि स्राव (ल्यूकोरिया) की मात्रा बढ़ जाती है। यह स्राव एक सुरक्षा कवच का काम करता है, जो बाहरी बैक्टीरिया को गर्भाशय तक पहुंचने से रोकता है और शिशु को सुरक्षित रखता है।
- गर्भनिरोधक गोलियाँ: हार्मोनल गर्भनिरोधक (जैसे बर्थ कंट्रोल पिल) लेने से हार्मोन का संतुलन बदल जाता है, जिससे स्राव के पैटर्न और मात्रा में भी बदलाव आ सकता है।
कब समझें कि कुछ गड़बड़ है?
जब तक स्राव साफ़, पारदर्शी या हल्का सफ़ेद होता है, पतला या खिंचाव वाला होता है और उसमें कोई बुरी गंध नहीं होती, तब तक यह पूरी तरह से सामान्य और स्वस्थ माना जाता है। इसकी मात्रा अधिक होने पर भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं होती। लेकिन अगर स्राव के रंग में बदलाव आ जाए — जैसे यह पीला, हरा या भूरा हो जाए, या उसमें तेज़, अप्रिय (जैसे मछली जैसी) गंध आने लगे, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। इसी तरह, अगर स्राव की बनावट दही या पनीर जैसे गाढ़े थक्कों में बदल जाए, या योनि और उसके आस-पास खुजली, लालिमा या जलन महसूस हो, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना ज़रूरी है, क्योंकि सही समय पर इलाज और स्वच्छता बरतने से संक्रमण को आसानी से रोका जा सकता है।
योनि से ‘अंडे की सफेदी’ जैसे स्राव का अधिक निकलना आपके शरीर के प्रजनन के लिए तैयार होने का एक सकारात्मक और प्राकृतिक संकेत है। यह महिलाओं को अपने स्वास्थ्य और उपजाऊ अवधि को समझने में मदद करता है।
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