पंजाबी संगीत धरोहर के संरक्षण हेतु विश्वविद्यालय ने उठाया अनूठा अकादमिक कदम
1 मई 2025, नई दिल्ली
गुरु काशी विश्वविद्यालय, तलवंडी साबो ने पंजाब की सूफी और लोक संगीत परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से ‘सूफी और लोक संगीत विरासत पीठ’ की स्थापना की है। विश्वविद्यालय ने इस पीठ के अध्यक्ष पद पर प्रसिद्ध सूफी गायक और पद्म श्री सम्मानित हंसराज हंस की नियुक्ति की घोषणा बुधवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान की।
पीठ का उद्देश्य शोध, शिक्षा, प्रलेखन और सांस्कृतिक जनसंपर्क के माध्यम से संगीत परंपराओं को संरक्षित करना है। हंसराज हंस के साथ, पीठ के कार्यकारी निदेशक के रूप में प्रो. डॉ. गुरप्रीत कौर और परियोजना समन्वयक के रूप में डॉ. अमन सूफी को नियुक्त किया गया है।
गुरु काशी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रमेश्वर सिंह ने इस पहल को “संस्कृति को अतीत और भविष्य के बीच जोड़ने वाला सेतु” बताते हुए कहा कि यह पीठ अकादमिक दृष्टिकोण से सूफी और लोक संगीत की गहराइयों तक पहुँचने का प्रयास करेगी।
इस मौके पर एक प्रतिष्ठित सलाहकार मंडल भी गठित किया गया, जिसमें भारत और विदेशों से कई संगीतज्ञ, शिक्षाविद और विद्वान शामिल हैं। मंडल के मुख्य संरक्षक सरदार गुरलाभ सिंह सिद्धू (चांसलर, गुरु काशी विश्वविद्यालय) हैं, जबकि अन्य सदस्यों में सूफी गुरु पूरन शाह कोटी, अमेरिका से सरदार चरणजीत सिंह बट्ठ, कनाडा से डॉ. दलबीर सिंह कथूरिया, यूके से प्रीत इंदर ढिल्लों, और भारत से प्रो. डी. एन. जौहर, डॉ. जसपाल कौर कांग, डॉ. हुकुम चंद एवं डॉ. नीलम पॉल जैसे नाम शामिल हैं।
“धरोहर को भावी पीढ़ियों तक ले जाने का अवसर”
हंसराज हंस ने अपनी नियुक्ति पर आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मैंने अपना जीवन सूफी संतों की वाणियों और पंजाब की मिट्टी की खुशबू लिए गीतों को समर्पित किया है। यह पीठ मुझे उस धरोहर को शैक्षणिक रूप से संरक्षित करने का सुअवसर प्रदान कर रही है।”
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय की महिला कुलाधिपति श्रीमती उषा सिंह ने हंसराज हंस को बधाई देते हुए उनके योगदान की सराहना की। वहीं, डॉ. गुरप्रीत कौर ने पीठ की आगामी गतिविधियों की रूपरेखा साझा की जिसमें कार्यशालाएं, मौखिक परंपराओं का दस्तावेजीकरण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और राष्ट्रीय सांस्कृतिक उत्सवों का आयोजन प्रमुख रहेगा।
इस अवसर पर डॉ. रमेश्वर सिंह, ई. सुखविंदर सिंह सिद्धू (महासचिव, बालाजी एजुकेशन ट्रस्ट), डॉ. दलबीर सिंह कथूरिया, प्रो. डी. एन. जौहर, और डॉ. नीलम पॉल सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। कुछ सदस्य वर्चुअल रूप से कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद प्रस्ताव और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए आयोजित स्वागत समारोह के साथ हुआ।
