जनगणना में जाति की एंट्री! चुनाव से पहले सियासी पारा हाई

जनगणना में जाति की एंट्री! चुनाव से पहले सियासी पारा हाई

2025 की जनगणना से पहले जातिगत आंकड़ों को लेकर केंद्र ने जो संकेत दिए हैं, वो चुनावी चाल है या सामाजिक बदलाव की दस्तक – देशभर में छिड़ी है बहस

30 अप्रैल 2025, नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने 2025 की शुरुआत में लंबे समय से लंबित जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अद्यतन करने की योजना बनाई है। हालांकि, इस बार की जनगणना में सभी जातियों के विस्तृत आंकड़े शामिल किए जाएंगे या नहीं, इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जैसे विपक्षी दलों ने सरकार से मांग की है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सटीक जनसंख्या जानने के लिए जातिगत जनगणना कराई जाए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार से स्पष्टता की मांग करते हुए कहा कि संविधान के अनुसार, ऐसी जातिगत जनगणना करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने मुंबई में कहा कि 2025 में कोई जाति आधारित जनगणना नहीं होगी और कांग्रेस पर जातिगत राजनीति करने का आरोप लगाया।

बिहार सरकार ने 2023 में अपनी जातिगत सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की, जिसमें पाया गया कि राज्य की 63% आबादी OBC और EBC वर्गों से है। इस रिपोर्ट के बाद, OBC आरक्षण को 27% से बढ़ाने की मांगें उठने लगी हैं।

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केंद्र सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि 2025 की जनगणना में सभी जातियों के आंकड़े शामिल किए जाएंगे या नहीं। इससे पहले, 2011 में हुई सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) के आंकड़े भी सार्वजनिक नहीं किए गए थे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जातिगत जनगणना का मुद्दा आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, जहां OBC और EBC वर्गों की आबादी अधिक है।

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