बिहार के बेटे सेतु मिश्रा का कमाल, एशियन U23 में भारत की रिले टीम को दिलाया गोल्ड

बिहार के बेटे सेतु मिश्रा का कमाल, एशियन U23 में भारत की रिले टीम को दिलाया गोल्ड

बिहार के पूर्वी चंपारण के 21 वर्षीय धावक सेतु मिश्रा ने एशियन U23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में भारत की मिश्रित 4×400 मीटर रिले टीम के साथ स्वर्ण पदक जीतकर राज्य और देश का नाम रोशन किया।

नई दिल्ली: 9 जुलाई 2026 का दिन बिहार के खेल इतिहास मे एक यादगार उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया। पूर्वी चंपारण के 21 वर्षीय धावक सेतु मिश्रा ने चीन के ओरदोस में आयोजित पहले Asian U23 Athletics Championships में भारत की मिश्रित 4×400 मीटर रिले टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय टीम ने 3:18.64 सेकंड का समय लेकर मेजबान चीन को मात्र 0.10 सेकंड से पीछे छोड़ा। यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि बिहार के लिए एथलेटिक्स के क्षेत्र में नई उम्मीद और पहचान का प्रतीक है। सेतु मिश्रा अब राज्य के उन युवा खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

पूर्वी चंपारण से इंटरनेशनल मंच तक

सेतु मिश्रा का जन्म 12 जून, 2005 को बिहार के मोतिहारी में हुआ था। एक साधारण परिवार से आने वाले सेतु ने कम उम्र में ही अपनी दौड़ने की काबिलियत और खेलों के प्रति लगन से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा।

स्कूल-लेवल की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने के बाद, उन्होंने 400-मीटर दौड़ को अपना मुख्य इवेंट बनाया। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, अप्रैल 2026 तक उन्होंने 46.97 सेकंड का अपना बेस्ट समय दर्ज किया और भारत के होनहार क्वार्टर-माइलर्स (400-मीटर धावकों) में अपनी जगह बनाई।

नेशनल प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के कारण उन्हें नेशनल ट्रेनिंग कैंप और एशियन U23 टीम के लिए चुना गया। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) द्वारा दी गई ट्रेनिंग और मौकों ने उनके करियर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

ओरदोस में स्वर्ण पदक की रोमांचक जीत

एशियन U23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 का आयोजन 9 से 12 जुलाई तक चीन के Ordos में हुआ। यह इस आयु वर्ग की पहली एशियाई चैंपियनशिप थी, जिसमें भारत ने 54 सदस्यीय दल भेजा।

मिश्रित 4×400 मीटर रिले टीम में अस्तिक प्रधान, संदरामोल साबू, सेतु मिश्रा और श्रावणी सांगले शामिल थे। टीम ने शुरुआत से ही संतुलित प्रदर्शन किया। सेतु मिश्रा ने अपने महत्वपूर्ण लेग में शानदार दौड़ लगाकर भारत को मजबूत स्थिति में बनाए रखा।

अंतिम चरण में श्रावणी सांगले ने शानदार फिनिश करते हुए भारत को 3:18.64 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक दिलाया। चीन की टीम 3:18.74 सेकंड के समय के साथ दूसरे स्थान पर रही। फोटो फिनिश के बाद भारत की जीत की पुष्टि हुई और भारतीय दल में उत्साह की लहर दौड़ गई।

बिहार एथलेटिक्स के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि

सेतु मिश्रा की कामयाबी को बिहार में खेलों के इतिहास में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। लंबे समय से राज्य को एथलेटिक्स में वह पहचान नहीं मिल पाई थी जिसकी उसे ज़रूरत थी, लेकिन हाल के वर्षों में युवा एथलीटों ने इस स्थिति को बदलना शुरू कर दिया है।

इस साल की शुरुआत में, बिहार के रोहतास ज़िले के पीयूष राज ने एशियन जूनियर (U20) चैंपियनशिप में पुरुषों की 4×400 मीटर रिले दौड़ में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर राज्य के लिए एक इंटरनेशनल एथलेटिक्स मेडल हासिल किया था। सेतु मिश्रा का गोल्ड मेडल इस उपलब्धि को और आगे बढ़ाता है।

बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ट्रेनिंग कैंप, रेजिडेंशियल एकेडमी और ‘खेलो इंडिया’ जैसी योजनाओं के ज़रिए एथलीटों को बेहतर मौके दे रहा है। नतीजतन, बिहार के युवा एथलीट अब नेशनल और इंटरनेशनल दोनों मंचों पर अपना हुनर ​​दिखा रहे हैं।

चुनौतियों के बीच संघर्ष और सफलता

छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले खिलाड़ियों को अक्सर सीमित प्रशिक्षण सुविधाओं, पोषण की कमी, आर्थिक चुनौतियों और प्रतियोगी अनुभव की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सेतु मिश्रा ने भी इन परिस्थितियों के बीच लगातार मेहनत और अनुशासन के बल पर अपनी पहचान बनाई।

परिवार का सहयोग, स्थानीय कोचों का मार्गदर्शन और बाद में राज्य तथा राष्ट्रीय संस्थाओं से मिले समर्थन ने उनके सफर को मजबूत आधार दिया। राष्ट्रीय U23 प्रतियोगिताओं में उनके प्रदर्शन ने उन्हें एशियन चैंपियनशिप के लिए चयनित होने का अवसर दिलाया।

टीमवर्क और रणनीति का शानदार उदाहरण

मिक्स्ड 4×400 मीटर रिले में, टीम का तालमेल उतना ही ज़रूरी है जितना कि खिलाड़ियों का व्यक्तिगत हुनर। भारतीय टीम ने बैटन बदलने, रफ़्तार पर नियंत्रण रखने और फ़ाइनल फ़िनिश में बेहतरीन तालमेल दिखाया।

आस्तिक प्रधान ने मज़बूत शुरुआत की, संद्रमोल साबू ने लय बनाए रखी, सेतु मिश्रा ने भारत की उम्मीदें ज़िंदा रखीं और श्रावणी सांगले ने निर्णायक फ़ाइनल लेग पूरा किया। यह जीत भारतीय रिले प्रोग्राम की बढ़ती मज़बूती को भी दिखाती है।

बिहार और देश भर में खुशी की लहर

सेतु मिश्रा की स्वर्णिम उपलब्धि की खबर मिलते ही बिहार में खुशी का माहौल बन गया। खेल प्रेमियों, अधिकारियों और आम नागरिकों ने उन्हें बधाई दी। सोशल मीडिया पर भी उनके नाम की चर्चा तेज रही और लोगों ने इसे बिहार के लिए गौरव का क्षण बताया।

इस उपलब्धि ने न केवल राज्य के युवाओं को प्रेरित किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर छोटे कस्बों से आने वाले खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

आगे की राह

सिर्फ़ 21 साल की उम्र में सेतु मिश्रा ने अपने करियर की शानदार शुरुआत की है। आने वाले सालों में उनका लक्ष्य 400-मीटर इवेंट में अपने पर्सनल बेस्ट को बेहतर बनाना, सीनियर नेशनल टीम में जगह बनाना और एशियन गेम्स व अन्य बड़े इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन में भारत का प्रतिनिधित्व करना होगा।

यह गोल्ड मेडल बिहार के लिए प्रेरणा का स्रोत है। अगर राज्य में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रेनिंग की सुविधाएँ और टैलेंट की पहचान करने वाले प्रोग्राम को लगातार मज़बूत किया जाए, तो भविष्य में और भी युवा एथलीट इंटरनेशनल लेवल पर सफलता हासिल कर सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *