“भारत की जीत पर राजनीति हावी: पाकिस्तान से हैंडशेक से इनकार”

भारत की जीत पर राजनीति

एशिया कप 2025 में टीम इंडिया ने दर्ज की 7 विकेट से जीत, लेकिन खिलाड़ियों के रुख ने छेड़ी नई बहस

भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप 2025 का ग्रुप-ए मुकाबला क्रिकेट के लिहाज से जितना ऐतिहासिक था, उतना ही यह मैदान से बाहर के विवादों और भावनात्मक उबाल का भी गवाह बना। भारत ने पाकिस्तान को सात विकेट से हराकर सुपर-फोर की ओर कदम बढ़ा लिए हैं, लेकिन इस जीत की चमक राजनीतिक और कूटनीतिक घटनाओं से धुंधली हो गई।

मुकाबले से पहले ही पाकिस्तान के खिलाफ खेलने को लेकर देशभर में बहिष्कार की आवाज़ें उठ रही थीं। कई सामाजिक संगठनों ने सरकार से मैच रद्द करने की मांग की थी, लेकिन बीसीसीआई और केंद्र सरकार ने इसे खेल भावना के तहत मंजूरी दी। हालांकि, जैसे ही भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव और उनकी टीम ने परंपरागत हैंडशेक की रस्म में हिस्सा लेने से इनकार किया, यह मैच खेल से कहीं ज़्यादा एक राजनीतिक संदेश बन गया। टीम इंडिया का यह फैसला देश की भावनाओं के साथ जुड़ाव दिखाने के रूप में देखा जा रहा है।

इस घटना का असर सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर भारतीय प्रशंसकों ने टीम इंडिया की तारीफ करते हुए कहा कि यह कदम “खेल से ऊपर देश” की भावना को दर्शाता है। वहीं, कुछ आलोचकों का मानना है कि खिलाड़ियों को मैदान पर राजनीति से ऊपर उठकर खेल भावना दिखानी चाहिए थी। ट्विटर (अब X) और इंस्टाग्राम पर #NoHandshake और #BoycottPakistan जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। स्टेडियम में भी भारतीय दर्शकों ने नारेबाज़ी करके खिलाड़ियों के इस फैसले का समर्थन किया।

दूसरी ओर, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने इसे खेल भावना के खिलाफ बताते हुए आधिकारिक शिकायत दर्ज कर दी है। पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ शोएब अख्तर ने इस कदम को “अत्यधिक राजनीतिकरण” कहा, वहीं पाक कप्तान सलमान अली आगा पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन से नदारद रहे। दशकों से हैंडशेक की परंपरा क्रिकेट को “जेंटलमैन गेम” की पहचान देती रही है, लेकिन इस बार इसका टूटना रिश्तों में बढ़ती खटास का प्रतीक बन गया।

इस बीच, पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना के बयान ने विवाद को और गहरा दिया। रैना ने कहा कि भारतीय खिलाड़ी व्यक्तिगत तौर पर पाकिस्तान के खिलाफ खेलने के इच्छुक ही नहीं थे, लेकिन बीसीसीआई के दबाव में उतरना पड़ा। उनका कहना था कि खिलाड़ियों का मनोबल राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित था और जीत के बाद भी वे इसे खुलकर सेलिब्रेट नहीं कर पाए।

स्पष्ट है कि भारत की जीत क्रिकेट के लिहाज से शानदार थी, लेकिन इस मुकाबले का प्रभाव सिर्फ स्कोरकार्ड तक सीमित नहीं रहा। यह मैच एक ऐसे दौर का प्रतीक बन गया है, जहां खेल और राजनीति एक-दूसरे से अलग नहीं रह पा रहे। भारत सुपर-फोर में पहुंच चुका है, लेकिन चर्चा क्रिकेट की उपलब्धि से ज्यादा उस निर्णय और संदेश की हो रही है जिसने इस “जेंटलमैन गेम” की परंपरा को चुनौती दी है।

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