फिट दिखने वाले युवा भी अचानक क्यों हो रहे हैं कार्डियक अरेस्ट का शिकार? जानिए बढ़ते हार्ट रिस्क, चेतावनी संकेत और डॉक्टरों की सलाह।
नई दिल्ली: एक समय था जब हार्ट अटैक और अचानक होने वाली कार्डियक डेथ (Sudden Cardiac Death) को बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। डॉक्टरों के अनुसार, आज किशोर, युवा खिलाड़ी और 30-40 वर्ष की उम्र के कामकाजी लोग भी गंभीर हृदय संबंधी आपात स्थितियों का सामना कर रहे हैं।
जिम में वर्कआउट करते हुए, खेल के मैदान में दौड़ते हुए या सामान्य दिनचर्या के दौरान अचानक गिर पड़ने वाले युवाओं की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। भले ही ऐसे मामले अभी बहुत आम नहीं हैं, लेकिन इनकी बढ़ती संख्या ने युवा पीढ़ी के हृदय स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खराब जीवनशैली, बढ़ता मोटापा, तनाव, मधुमेह और कई बार बिना पहचान वाली हृदय संबंधी बीमारियां इस बढ़ते खतरे की मुख्य वजह हैं।
हार्ट अटैक और सडन कार्डियक डेथ में क्या अंतर है?
अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं।
हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।
वहीं सडन कार्डियक डेथ (SCD) हृदय की विद्युत प्रणाली में अचानक गड़बड़ी आने के कारण होती है। इसमें दिल की धड़कन अचानक रुक जाती है, सांस बंद हो जाती है और व्यक्ति कुछ ही सेकंड में बेहोश हो जाता है।
हालांकि कुछ मामलों में हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है, लेकिन युवाओं में होने वाली अचानक मौतों के पीछे अक्सर छिपी हुई हृदय संबंधी समस्याएं जिम्मेदार होती हैं।
खेल विशेषज्ञों की चेतावनी
“हर 300 युवाओं में से एक ऐसा होता है, जिसमें कोई न कोई ऐसी हृदय संबंधी समस्या मौजूद होती है जो उसे अचानक कार्डियक अरेस्ट के खतरे में डाल सकती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ऐसे लगभग 80% युवाओं में पहले से कोई लक्षण दिखाई नहीं देते।”
— डॉ. जोनाथन ड्रेज़नर, स्पोर्ट्स कार्डियोलॉजिस्ट
आखिर युवाओं में क्यों बढ़ रहा है दिल की बीमारियों का खतरा?
1. बैठे-बैठे गुजर रही जिंदगी
लंबे समय तक ऑफिस की कुर्सी पर बैठना, घंटों मोबाइल चलाना और शारीरिक गतिविधियों की कमी आज की जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी है।
- मोटापा तेजी से बढ़ रहा है।
- हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर कम उम्र में ही देखने को मिल रहे हैं।
- हृदय रोगों के जोखिम पहले की तुलना में बहुत जल्दी विकसित हो रहे हैं।
2. तनाव बन रहा है दिल का दुश्मन
पढ़ाई का दबाव, नौकरी की प्रतिस्पर्धा, आर्थिक जिम्मेदारियां और सोशल मीडिया पर लगातार तुलना—ये सभी युवाओं को मानसिक तनाव की ओर धकेल रहे हैं।
लगातार तनाव के कारण शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिससे:
- रक्तचाप बढ़ता है।
- रक्त वाहिकाओं में सूजन आती है।
- दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
3. कम उम्र में बढ़ रहा है डायबिटीज का खतरा
टाइप-2 डायबिटीज अब केवल मध्यम आयु वर्ग की बीमारी नहीं रही।
आज बड़ी संख्या में युवा और किशोर इससे प्रभावित हो रहे हैं।
- डायबिटीज रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है।
- मोटापे के साथ मिलकर यह हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ा देती है।
4. स्मोकिंग और वेपिंग का बढ़ता चलन
कई युवा सिगरेट छोड़कर वेपिंग को सुरक्षित विकल्प मानते हैं, जबकि विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं।
- वेपिंग रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है।
- रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ाती है।
- दिल की धड़कनों में खतरनाक अनियमितता पैदा कर सकती है।
दिल की बीमारी अचानक नहीं होती
“हृदय रोग 60 साल की उम्र में अचानक पैदा नहीं होता। यह कई वर्षों तक धीरे-धीरे विकसित होता है और इसकी शुरुआत अक्सर 20 और 30 की उम्र में ही हो जाती है।”
— डॉ. स्टावरोस स्टावराकिस, कार्डियोलॉजिस्ट
5. नींद की कमी भी है बड़ा कारण
यदि आप नियमित रूप से 6 घंटे से कम सोते हैं, तो यह आपके दिल के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।
पर्याप्त नींद न लेने से:
- ब्लड प्रेशर बढ़ता है।
- शरीर में सूजन बढ़ती है।
- मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
6. कोविड-19 के बाद बढ़ी चिंताएं
महामारी के बाद हुए कई अध्ययनों में युवाओं में हृदय संबंधी मौतों में वृद्धि दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार कोविड-19:
- हृदय की मांसपेशियों में सूजन पैदा कर सकता है।
- रक्त के थक्के बनने की संभावना बढ़ा सकता है।
- दिल की विद्युत प्रणाली को प्रभावित कर सकता है।
7. छिपी हुई आनुवंशिक बीमारियां
कई बार व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ दिखाई देता है, लेकिन उसके दिल में ऐसी समस्या मौजूद होती है जिसका उसे पता भी नहीं होता।
इनमें शामिल हैं:
- हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (HCM)
- लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम
- ब्रुगाडा सिंड्रोम
- वोल्फ-पार्किंसन-व्हाइट सिंड्रोम
ये बीमारियां अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती हैं।
स्वस्थ दिखने वाले युवा भी हो सकते हैं जोखिम में
“जब किसी प्रसिद्ध युवा खिलाड़ी या स्थानीय किशोर की अचानक कार्डियक अरेस्ट से मृत्यु होती है, तो लोग हैरान रह जाते हैं क्योंकि वह पूरी तरह स्वस्थ दिखाई देता था। लेकिन सच्चाई यह है कि अचानक कार्डियक अरेस्ट किसी के साथ भी हो सकता है।”
— डॉ. डेविड ब्रैडली, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट
कभी नजरअंदाज न करें इन संकेतों को
यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
- व्यायाम के दौरान या बाद में बेहोश होना
- सीने में दर्द, दबाव या जकड़न
- दिल की धड़कन का तेज या अनियमित होना
- सामान्य गतिविधियों में भी सांस फूलना
- अत्यधिक थकान
- परिवार में कम उम्र में अचानक मृत्यु का इतिहास
दिल को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
- नियमित शारीरिक गतिविधि करें रोज कम से कम 30 मिनट पैदल चलें, दौड़ें, साइकिल चलाएं या कोई भी पसंदीदा गतिविधि करें।
- संतुलित भोजन लें जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और प्रोसेस्ड फूड कम करें। फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज को भोजन का हिस्सा बनाएं।
- 7-9 घंटे की नींद लें अच्छी नींद को अपनी प्राथमिकता बनाएं।
- धूम्रपान और वेपिंग से दूरी बनाएं दिल की सुरक्षा के लिए इन्हें पूरी तरह छोड़ना सबसे अच्छा विकल्प है।
- तनाव को नियंत्रित करें योग, ध्यान, व्यायाम और परिवार या दोस्तों से बातचीत तनाव कम करने में मदद कर सकती है।
- नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं 30 वर्ष की उम्र से पहले एक बेसिक कार्डियक जांच जरूर करवाएं, खासकर यदि परिवार में हृदय रोग या अचानक मृत्यु का इतिहास रहा हो।
बढ़ते मामलों पर विशेषज्ञों की चिंता
“1999 से 2012 के बीच हृदय संबंधी मौतों को कम करने में जो प्रगति हुई थी, वह पिछले कुछ वर्षों में काफी हद तक उलट गई है। आज युवा वयस्कों में हार्ट फेलियर से होने वाली मौतों की दर फिर से बढ़ रही है।”
— डॉ. मारात फुडिम, कार्डियोलॉजिस्ट
क्या युवाओं को हार्ट स्क्रीनिंग करवानी चाहिए?
विशेषज्ञ हां कहते हैं.
यह विशेष रूप से एथलीटों, कठिन शारीरिक श्रम में लगे व्यक्तियों और कम उम्र में अचानक हृदय की मृत्यु के पारिवारिक इतिहास वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण है।
एक मानक हृदय जांच में शामिल हो सकते हैं:
- एक शारीरिक परीक्षण
- पारिवारिक चिकित्सा इतिहास
- ईसीजी
- यदि आवश्यक हो तो अतिरिक्त हृदय परीक्षण
स्कूलों, कॉलेजों, जिम और सार्वजनिक स्थानों पर एईडी (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर) उपलब्ध होना भी आवश्यक है, क्योंकि वे आपात स्थिति के दौरान लोगों की जान बचा सकते हैं।
खिलाड़ियों में अचानक मौत के पीछे कई कारण
“35 वर्ष या उससे कम उम्र के खिलाड़ियों में अचानक कार्डियक अरेस्ट के कई कारण हो सकते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि दिल सामान्य होता है, लेकिन परिस्थितियां और समय ऐसा बन जाता है कि गंभीर घटना घट जाती है।”
— डॉ. जॉन पी. हिगिंस, स्पोर्ट्स कार्डियोलॉजिस्ट
युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक और सडन कार्डियक डेथ के मामले एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे हैं। खराब जीवनशैली, तनाव, मोटापा, मधुमेह और छिपी हुई आनुवंशिक हृदय समस्याएं इसके प्रमुख कारण हैं।
अच्छी बात यह है कि समय पर जांच, स्वस्थ आदतें और जागरूकता के जरिए इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आखिरकार, दिल की बीमारी 60 की उम्र में नहीं शुरू होती—उसकी नींव अक्सर 20 और 30 की उम्र में ही पड़ जाती है।
