शरीर में विटामिन D की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, जानिए विटामिन D की कमी के लक्षण, कारण और इससे बचने के आसान तरीके
नई दिल्ली: आजकल लोगों की जीवनशैली पहले की तुलना में काफी बदल चुकी है। दिन का बड़ा हिस्सा घर, ऑफिस या बंद कमरों में बीत जाता है। धूप में समय कम बिताने और खान-पान की बदलती आदतों की वजह से शरीर में कई जरूरी पोषक तत्वों की कमी देखने को मिल रही है। इन्हीं में से एक है विटामिन-D की कमी, जो धीरे-धीरे एक आम स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है।
डॉक्टरों के मुताबिक विटामिन-D हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी पोषक तत्व है। यह हड्डियों को मजबूत रखने, कैल्शियम के अवशोषण में मदद करने और मांसपेशियों को स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। अगर शरीर में इसकी मात्रा कम हो जाए तो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि विटामिन-D का सबसे बड़ा और प्राकृतिक स्रोत सूरज की रोशनी है। जब हमारी त्वचा धूप के संपर्क में आती है तो शरीर खुद ही विटामिन-D बनाता है। लेकिन आधुनिक जीवनशैली में लोग धूप से दूर रहते हैं। सुबह से शाम तक ऑफिस या घर के अंदर रहने के कारण शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती, जिससे इसकी कमी होने लगती है।
हड्डियों पर सबसे ज्यादा असर
विटामिन-D की कमी का सीधा असर हड्डियों पर पड़ता है। दरअसल, यह शरीर में कैल्शियम को सही तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है। जब विटामिन-D कम हो जाता है तो कैल्शियम का उपयोग ठीक से नहीं हो पाता और हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।
लंबे समय तक कमी बने रहने पर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्या हो सकती है, जिसमें हड्डियां पतली और नाजुक हो जाती हैं। इसके कारण मामूली चोट या गिरने पर भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
बच्चों में अगर विटामिन-D की गंभीर कमी हो जाए तो रिकेट्स नाम की बीमारी हो सकती है। इस बीमारी में हड्डियों का विकास ठीक से नहीं हो पाता और पैरों में टेढ़ापन आ सकता है। वहीं वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया नाम की स्थिति विकसित हो सकती है, जिसमें हड्डियां नरम हो जाती हैं और उनमें दर्द बना रहता है।
मांसपेशियों में कमजोरी और थकान
कई लोगों को अक्सर मांसपेशियों में दर्द, शरीर में कमजोरी या लगातार थकान महसूस होती है। कई बार इसकी वजह विटामिन-D की कमी भी हो सकती है।डॉक्टरों का कहना है कि विटामिन-D मांसपेशियों के सही कामकाज के लिए भी जरूरी है। इसकी कमी होने पर मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और शरीर में सुस्ती महसूस होती है। बुजुर्गों में यह समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है क्योंकि इससे गिरने और चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
इम्यून सिस्टम पर भी पड़ सकता है असर
विटामिन-D शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने में भी मदद करता है। अगर इसकी मात्रा कम हो जाए तो शरीर संक्रमण से लड़ने में कमजोर पड़ सकता है। कुछ शोध यह भी बताते हैं कि पर्याप्त विटामिन-D होने से शरीर को कई प्रकार के संक्रमणों से बचाव में मदद मिलती है।
कमी के संकेत क्या हो सकते हैं
विटामिन-D की कमी कई बार धीरे-धीरे सामने आती है, इसलिए लोग इसे आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं। इसके कुछ सामान्य संकेत हो सकते हैं—
- बार-बार थकान महसूस होना
- हड्डियों या पीठ में दर्द
- मांसपेशियों में कमजोरी
- मूड खराब रहना या उदासी महसूस होना
- बार-बार सर्दी-जुकाम या संक्रमण होना
हालांकि इन लक्षणों के आधार पर ही निष्कर्ष निकालना सही नहीं होता। इसकी सही जानकारी के लिए डॉक्टर की सलाह और खून की जांच जरूरी होती है।
कमी से बचने के आसान तरीके
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ सरल आदतों को अपनाकर विटामिन-D की कमी से काफी हद तक बचा जा सकता है।
सबसे जरूरी है रोजाना कुछ समय धूप में बिताना। सुबह की हल्की धूप में 15 से 30 मिनट तक रहना शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है।
इसके अलावा खान-पान पर भी ध्यान देना जरूरी है। अंडा, मछली, दूध और विटामिन-D से समृद्ध (फोर्टिफाइड) डेयरी उत्पाद इसके अच्छे स्रोत माने जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति में इसकी ज्यादा कमी हो तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट भी दिए जा सकते हैं।
समय रहते ध्यान देना जरूरी
डॉक्टरों का मानना है कि विटामिन-D की कमी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। हालांकि यह समस्या आम है, लेकिन अगर लंबे समय तक अनदेखी की जाए तो यह हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी कई परेशानियों का कारण बन सकती है।
इसलिए अगर शरीर में लगातार थकान, कमजोरी या हड्डियों में दर्द महसूस हो रहा हो तो डॉक्टर से सलाह लेकर जांच करवाना बेहतर होता है। सही समय पर पहचान और उपचार से इस समस्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
