न्यायपालिका की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, डॉ. पॉल ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर की जवाबदेही और कानूनी कार्रवाई की मांग

न्यायपालिका की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, डॉ. पॉल ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर की जवाबदेही और कानूनी कार्रवाई की मांग

ग्लोबल पीस इनिशिएटिव के संस्थापक डॉ. के.ए. पॉल ने सर्वोच्च न्यायालय परिसर में मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति गवाई पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे न केवल न्यायपालिका की गरिमा पर हमला बताया, बल्कि भारत में कानून व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर भी गंभीर सवाल उठाए।

डॉ. पॉल ने कहा कि यह घटना दिनदहाड़े हुई, जो न्यायपालिका की सुरक्षा में बड़ी चूक को उजागर करती है। उन्होंने चिंता जताई कि आरोपी वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश किशोर (71) को हमले के केवल तीन घंटे के भीतर रिहा कर दिया गया, जो न्याय व्यवस्था पर संदेह पैदा करता है।
उन्होंने कहा, “अगर देश के मुख्य न्यायाधीश तक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक अपनी सुरक्षा को लेकर कैसे निश्चिंत रह सकते हैं?”

उन्होंने यह भी कहा कि न्याय सभी के लिए समान और निष्पक्ष होना चाहिए, चाहे व्यक्ति का सामाजिक दर्जा, शिक्षा या प्रतिष्ठा कुछ भी हो। आरोपी की त्वरित रिहाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि क्या यह किसी दबाव या विशेष प्रभाव का परिणाम है।
डॉ. पॉल ने कहा, “कानून सबके लिए एक समान होना चाहिए। कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, और सख्त कार्रवाई ही जनता के न्यायपालिका पर विश्वास को मजबूत कर सकती है।”

उन्होंने यह चेतावनी दी कि यदि आरोपी को जवाबदेह नहीं ठहराया गया तो यह प्रवृत्ति आगे और हमलों को बढ़ावा दे सकती है तथा चरमपंथी सोच को बल मिल सकता है। उन्होंने आग्रह किया कि आरोपी को तुरंत पुनः गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।

डॉ. पॉल ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर सर्वोच्च न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था की त्वरित समीक्षा की मांग की। उन्होंने कहा, “न्यायाधीशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आवश्यक है। न्यायपालिका की

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