मिडिल ईस्ट तनाव से ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल, तेल आपूर्ति की चिंता के बीच सोना पांचवें दिन चढ़ा। महंगाई और ब्याज दर नीति पर टिकी निवेशकों की नजर।
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव ने सिर्फ राजनीतिक हालात ही नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित किया है। तेल और गैस आपूर्ति को लेकर बढ़ती अस्पष्टता के चलते ऊर्जा बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इस माहौल में निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा फायदा सोने को मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगातार पांचवें दिन मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। कीमतों में लगभग 0.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 5,360 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। पिछले कुछ सत्रों में कुल मिलाकर तीन प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई है। विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव के हर नए संकेत के साथ सोना निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता
क्षेत्र में चल रहे टकराव की वजह से तेल सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर मंडराते खतरे ने ऊर्जा बाजार की स्थिरता को झटका दिया है। अगर आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल संभव है, जिसका सीधा असर वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है।
अमेरिका में महंगाई का दबाव
ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी ने अमेरिका में महंगाई बढ़ने की चिंताओं को दोबारा बढ़ा दिया है। हालिया आर्थिक आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र की लागतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय जगत के दिग्गजों ने भी चेतावनी दी है कि यदि ऊर्जा संकट लंबा खिंचता है, तो महंगाई नियंत्रण में रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इसी बीच बाजार की नजरें अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीति पर टिकी हैं। निवेशकों को उम्मीद है कि ब्याज दरों में कटौती की संभावनाएं आगे खिसक सकती हैं, हालांकि कुछ कारोबारी सितंबर तक राहत की उम्मीद जता रहे हैं।
चांदी और अन्य धातुओं में भी हलचल
सोने के साथ-साथ चांदी में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। शुरुआती गिरावट के बाद इसमें सुधार दर्ज हुआ। प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी अन्य कीमती धातुओं ने भी सकारात्मक रुख दिखाया।
बदलती निवेश रणनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशक पोर्टफोलियो को संतुलित रखने की कोशिश कर रहे हैं। शेयर बाजार की अस्थिरता, ऊर्जा संकट और डॉलर की चाल ने सोने को फिर से केंद्र में ला दिया है।
मिडिल ईस्ट का तनाव अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि उसने वैश्विक निवेश धाराओं और आर्थिक नीतियों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में ऊर्जा बाजार की दिशा और केंद्रीय बैंकों के फैसले ही तय करेंगे कि सुरक्षित निवेश की यह दौड़ कितनी लंबी चलेगी।
