स्टॉक चेक में 802 बोतलें शराब गायब, व्यापारियों का दावा—”चूहों ने पी ली दारू”, उत्पाद विभाग ने बताया हास्यास्पद, नोटिस जारी कर मांगा जवाब
16 जुलाई 2025, नई दिल्ली
धनबाद जिले के बलियापुर और प्रधान खुंटा क्षेत्र में स्थित दो शराब दुकानों में स्टॉक ऑडिट के दौरान कुल 802 बोतल विदेशी शराब (Indian Made Foreign Liquor – IMFL) के गायब होने का मामला सामने आया है। जब इस पर संबंधित व्यापारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया, तो उन्होंने दावा किया कि यह नुकसान चूहों के कारण हुआ है, जिन्होंने शराब की बोतलों के ढक्कन चबाकर शराब पी ली।
उक्त दावा सामने आते ही उत्पाद विभाग ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया है। विभागीय अधिकारियों ने इसे ‘अविश्वसनीय और अस्वीकार्य’ तर्क बताते हुए स्पष्ट किया है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब का चूहों द्वारा नष्ट किया जाना व्यावहारिक रूप से असंभव है। विभाग ने दोनों दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब मांगा है।
नई शराब नीति से पहले चल रहा है राज्यव्यापी स्टॉक सत्यापन
गौरतलब है कि झारखंड सरकार की नई शराब नीति 1 सितंबर 2025 से लागू होने जा रही है, जिसके तहत अब राज्य सरकार खुद शराब की खुदरा बिक्री नहीं करेगी। इसके स्थान पर निजी लाइसेंसधारियों को ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से दुकानें आवंटित की जाएंगी। इसी के अंतर्गत राज्यभर में सरकारी स्टॉक का ऑडिट किया जा रहा है।
धनबाद के इन दुकानों में स्टॉक की भौतिक जांच के दौरान जब सैकड़ों शराब की बोतलें गायब पाई गईं, तो अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान लेते हुए उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी। व्यापारियों द्वारा दी गई चूहों की दलील को न केवल खारिज किया गया, बल्कि इसे एक ‘प्रशासन को भ्रमित करने का प्रयास’ माना गया।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई
धनबाद की सहायक उत्पाद आयुक्त रामलीला रवानी ने कहा,
“व्यापारियों द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण तथ्यहीन है। यह एक बेहद गंभीर मामला है। चूहों द्वारा शराब की इतनी बड़ी मात्रा का सेवन किया जाना न वैज्ञानिक रूप से संभव है और न ही व्यवहारिक रूप से। हमने व्यापारियों को नोटिस जारी किया है और शराब के मूल्य की क्षतिपूर्ति अनिवार्य रूप से वसूली जाएगी।”
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मामले में यदि गड़बड़ी या हेराफेरी की पुष्टि होती है, तो संबंधित दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए जा सकते हैं और आवश्यकतानुसार प्राथमिकी भी दर्ज की जाएगी।
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पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहला अवसर नहीं है जब चूहों पर प्रतिबंधित या जब्त सामग्री के गायब होने का आरोप लगाया गया है। पूर्व में बिहार और उत्तर प्रदेश में भी जब्त गांजा और भांग के नष्ट होने पर चूहों को दोषी ठहराया गया था। हालांकि, ऐसे सभी मामलों में प्रशासनिक स्तर पर कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के दावे अक्सर जिम्मेदारी से बचने के लिए किए जाते हैं, और यह प्रशासनिक पारदर्शिता तथा जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करते हैं।
धनबाद में सामने आया यह मामला न केवल एक अजीब बहाने की वजह से चर्चा में है, बल्कि यह राज्य की नई शराब नीति लागू होने से पूर्व पारदर्शिता, नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित करने की चुनौती को भी रेखांकित करता है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद सच सामने आता है या फिर यह मामला भी ‘चूहों की कहानियों’ में शामिल होकर दबा दिया जाएगा।
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