1 मार्च 2027 को होगी जनगणना की संदर्भ तिथि, पहाड़ी राज्यों में 1 अक्टूबर 2026 से होगी शुरुआत
16 जून 2025, नई दिल्ली
देश में 16 वर्षों की लंबी देरी के बाद, गणना करने की महावाणिज्यिक मशीन फिर से आवाज़ देगी—केंद्र सरकार ने 2027 में होने वाली जनगणना के लिए जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत सोमवार को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
इस बार की जनगणना दो चरणों में होगी:
- हाउसलिस्टिंग ऑपरेशन (HLO): इसमें हर घर का आधार, घर में उपलब्ध सुविधाएं, संपत्ति–संसाधन आदि का विवरण एकत्र किया जाएगा।
- जनसंख्या गणना (Population Enumeration): इस चरण में देश के प्रत्येक निवासी की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय जानकारी एकत्र की जाएगी।
मुख्य रूप से 1 मार्च 2027, आधी रात को देशभर में जनगणना की संदर्भ तिथि मानी जाएगी। वहीं एक विशेष रणनीति के तहत जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे उच्च ऊँचाई वाले ठंडे इलाकों में यह तारीख 1 अक्टूबर 2026 तय की गई है, ताकि बर्फबारी न पहुँचाए बाधा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया लगभग 21 महीनों में पूरी कर ली जाएगी। प्रारंभिक आंकड़े मार्च 2027 तक जारी हो जाएंगे, जबकि विस्तृत रिपोर्ट इसी वर्ष के अंत तक उपलब्ध कराई जाएगी। यह राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या की नई तस्वीर तो बनाएगा ही, साथ ही नीति निर्माण, संसाधन आवंटन और विकास योजनाओं के दृष्टिकोण को भी मजबूत करेगा।
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पिछली जनगणना 2011 में हुई थी और अगली 2021 में होनी चाहिए थी, लेकिन COVID‑19 महामारी ने इसे स्थगित कर दिया। अब 2027 तक यह महायोजना दोबारा पूरी होती दिख रही है, जो देश की सामाजिक एवं आर्थिक अमेरीका के लिए एक अहम टर्निंग पॉइंट सिद्ध होगी।
विशेष बातें:
- इस बार डिजिटल संबंधी पहलें बढ़ाई जाएंगी—जिनमें मोबाइल एप, ऑनलाइन डेटा जमा और जीपीएस से जुड़े सर्वे शामिल हो सकते हैं।
- सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2027 की जनगणना में देश की अनुमानित आबादी करीब 140 करोड़ की सीमा पार कर चुकी होगी।
- नागरिकों से अपील की गई है कि वे जनगणना अधिकारियों को पूरा सहयोग दें; साथ ही प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा के सभी मानदंडों का भी पालन किया जाएगा।
भारत की अगली जनगणना होगी एक नई शुरुआत—हर राज्य, जिला और गांव तक पहुँचकर तैयार किया जाएगा एक आधुनिक, सटीक और विश्वसनीय जनसांख्यिकीय दर्पण, जो भविष्य के भारत की नींव रखेगा।
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