वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर जापानी पर्यटकों को सांता हैट और स्विमसूट पहनने पर भीड़ ने घेरा, अपशब्द कहे और गंगा में ‘अपमान’ का आरोप लगाकर माफी मंगवाई।
वाराणसी, जो खुद को आध्यात्मिक शहर कहता है, वहां जापानी पर्यटकों के साथ ऐसा सलूक? क्रिसमस के मौके पर सांता क्लॉज की हैट और स्विमसूट पहनकर गंगा में डुबकी लगाने आए पर्यटकों को स्थानीय लोगों की भीड़ ने घेर लिया, गालियां दीं, अपमान किया और आखिरकार माफी मांगने पर मजबूर कर दिया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जहां पर्यटक हाथ जोड़कर माफी मांगते नजर आ रहे हैं। गुस्साई भीड़ उन्हें ‘गंगा का अपमान’ करने और यहां तक कि नदी में पेशाब करने का आरोप लगा रही थी। ये घटना 28 दिसंबर 2025 की है, दशाश्वमेध घाट पर हुई, और अब पूरे देश-दुनिया में चर्चा का विषय बन गई है।
आलोचना कैसे बढ़ रही है? भारतीयों की नजर से
सोशल मीडिया पर #VaranasiShame और #AtithiDevoBhava जैसे हैशटैग जमकर ट्रेंड कर रहे हैं। लोग बार-बार पूछ रहे हैं – “हम कहते हैं ‘अतिथि देवो भव:’, लेकिन मेहमानों के साथ ऐसा व्यवहार?” विपक्षी नेता इसे सरकार की पूरी नाकामी और बढ़ती धार्मिक कट्टरता का नतीजा बता रहे हैं। ज्यादातर भारतीय इसकी निंदा कर रहे हैं, क्योंकि ये हमारी ‘अतिथि देवो भव:’ वाली छवि को धूमिल कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी सुर्खियां बनीं, भारत को ‘असहिष्णु’ देश के तौर पर देखा जा रहा है। एक यूजर ने लिखा: “ये सिर्फ पर्यटकों का अपमान नहीं, भारत की साख का सवाल है।”
घटना का पूरा विवरण: क्या हुआ था?
सुबह के समय घाट पर स्नान करने आए इन पर्यटकों को किसी ने ‘गंगा में पेशाब करने’ का झूठा आरोप लगा दिया। भीड़ उत्तेजित हो गई – चिल्लाने लगे, धक्के मारे, फोन से वीडियो बनाते हुए अपमान किया। पर्यटकों ने सफाई देने की कोशिश की, लेकिन सुनने वाला कौन? आखिरकार, वे घुटनों पर बैठे हाथ जोड़कर माफी मांगने लगे। पूरा वीडियो 1 मिनट से ज्यादा का है, जो अब लाखों बार देखा जा चुका है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि धार्मिक जगह पर ‘अनुचित कपड़े’ पहनना गलत था, लेकिन ज्यादातर लोग इसे मोब लिंचिंग बता रहे हैं।
धर्मनिरपेक्षता और समानता की बात
ये घटना भारत की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाती है। हमारा संविधान सबको समान अधिकार देता है – चाहे कोई हिंदू हो, मुस्लिम, क्रिश्चियन या विदेशी। लेकिन यहां पर्यटकों को उनके कपड़ों और हैट (जो क्रिसमस का प्रतीक है) के लिए टारगेट किया गया, जो धार्मिक असहिष्णुता दिखाता है। समानता का मतलब है कि हर कोई अपनी संस्कृति का सम्मान करे, लेकिन दूसरे की आजादी पर हमला न करे। वाराणसी जैसे पवित्र शहर में तो और ज्यादा जरूरी है कि हम ‘एकता में विविधता’ का उदाहरण दें। अगर हम धर्मनिरपेक्ष रहेंगे, तो ऐसी घटनाएं कम होंगी – क्योंकि समानता से ही शांति आती है। याद रखें, गंगा सबकी है, न कि किसी एक समुदाय की।
भारत की छवि पर नकारात्मक प्रभाव
ये सिर्फ एक घटना नहीं, भारत की इंटरनेशनल इमेज पर बड़ा धब्बा है। पर्यटन हमारी इकोनॉमी का बड़ा हिस्सा है – 2024 में 10 मिलियन से ज्यादा विदेशी पर्यटक आए, लेकिन ऐसी खबरें उन्हें डराती हैं। जापान जैसे देशों से रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं, जहां भारत को ‘सुरक्षित डेस्टिनेशन’ नहीं माना जाएगा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने लाखों व्यूज पाए, जिससे ‘भारत असुरक्षित है’ का नैरेटिव बन रहा है। आर्थिक नुकसान – होटल, गाइड, लोकल बिजनेस सब प्रभावित। सबसे बुरा, हमारी ‘अतिथि देवो भव:’ वाली छवि धूमिल हो रही है, जो सदियों से हमारी पहचान है। अगर नहीं सुधरे, तो दुनिया हमें ‘कट्टर’ देश मानेगी, जो हमारे ग्लोबल स्टैंडिंग को नुकसान पहुंचाएगा।
आखिर में, ये हम सबकी जिम्मेदारी है कि भारत को एक स्वागत करने वाला देश बनाएं। पर्यटकों का सम्मान करें, क्योंकि वे हमारी संस्कृति को दुनिया तक ले जाते हैं।
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