तमिलनाडु: विवाद के बीच रोशनी की उम्मीद, थिरुपरंकुंद्रम में दीप जलाने को हरी झंडी

तमिलनाडु: विवाद के बीच रोशनी की उम्मीद, थिरुपरंकुंद्रम में दीप जलाने को हरी झंडी

थिरुपरंकुंद्रम दीप स्तंभ विवाद पर मद्रास हाई कोर्ट का अहम फैसला। कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति बनी रही, प्रशासन को शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश।

तमिलनाडु के मदुरै जिले की थिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी एक बार फिर सुर्खियों में है। कार्तिगई दीपम के अवसर पर दीप स्तंभ पर दीपक जलाने की परंपरा को लेकर उठा विवाद अब अदालत तक पहुंच गया था। इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने अहम फैसला सुनाते हुए न सिर्फ अपनी पहले दी गई अनुमति को बरकरार रखा, बल्कि प्रशासन को साफ निर्देश भी दिए कि शांति और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

क्या है पूरा मामला

थिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी मदुरै की एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां भगवान मुरुगन का प्रसिद्ध सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर स्थित है। इसी पहाड़ी पर सिकंदर बादशाह दरगाह भी मौजूद है, जिससे यह इलाका धार्मिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। लंबे समय से यहां कार्तिगई दीपम के मौके पर पहाड़ी पर बने एक पत्थर के स्तंभ, जिसे दीप स्तंभ या दीप थून कहा जाता है, पर दीपक जलाने की परंपरा चली आ रही है। इसी परंपरा को लेकर इस बार आपत्ति सामने आई, जिसके बाद मामला विवाद में बदल गया और अदालत तक पहुंच गया।

इस वजह से किसी भी फैसले को लागू करना प्रशासन के लिए आसान नहीं होता, क्योंकि छोटी-सी गलती या चूक भी वहां तनाव और विवाद को जन्म दे सकती है। इसलिए पुलिस और प्रशासन को अत्यधिक सतर्क रहकर हर कदम सोच-समझकर उठाना पड़ता है, ताकि दोनों समुदायों की भावनाओं का सम्मान हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे।

याचिका किसने दायर की थी

मद्रास हाई कोर्ट (मदुरै पीठ) में याचिका कुछ स्थानीय पक्षों/दरगाह से जुड़े व्यक्तियों की ओर से दायर की गई थी। इन याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जिस दीप स्तंभ (दीप थून) पर कार्तिगई दीपम जलाया जाता है, वह सिकंदर बादशाह दरगाह के आसपास के क्षेत्र में आता है, इसलिए वहां दीप जलाने से आपत्ति है।

हाई कोर्ट का रुख

मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले में साफ शब्दों में कहा कि उसने पहले जो आदेश दिया था, उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। अदालत का मानना है कि कार्तिगई दीपम जलाना वर्षों से चली आ रही एक धार्मिक परंपरा है और इसे अचानक रोका नहीं जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने यह भी समझाया कि परंपरा निभाते समय शांति और सुरक्षा सबसे अहम है, इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना पूरी तरह प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।

जमीनी स्तर पर हालात

कोर्ट के आदेश के बावजूद, त्योहार के दौरान मौके पर स्थिति पूरी तरह शांत नहीं रही। प्रशासन ने यह कहते हुए कुछ प्रतिबंध लगाए कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। इन पाबंदियों की वजह से कई श्रद्धालु तय स्थान तक नहीं पहुंच पाए, जिससे उनमें नाराज़गी देखी गई। जब यह बात हाई कोर्ट के सामने आई, तो अदालत ने प्रशासन से सवाल पूछे और कहा कि अगर कोई आदेश दिया गया है, तो उसे सही तरीके और भावना के साथ लागू किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर अदालत के निर्देशों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

फिलहाल क्या स्थिति है

फिलहाल हाई कोर्ट का आदेश पूरी तरह लागू है और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना है कि थिरुपरंकुंद्रम के दीप स्तंभ पर कार्तिगई दीपम परंपरा के अनुसार जलाया जा सके। साथ ही यह भी ध्यान रखना है कि इस प्रक्रिया में किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुंचे और इलाके में शांति बनी रहे। इस कारण प्रशासन हर कदम पर सतर्क है और अदालत भी मामले पर नजर बनाए हुए है, ताकि त्योहार के दौरान न तो किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न हो और न ही कानून-व्यवस्था में कोई समस्या आए।

थिरुपरंकुंद्रम दीप स्तंभ विवाद पर मद्रास हाई कोर्ट का फैसला साफ और स्पष्ट है। अदालत ने यह अनुमति दी है कि कार्तिगई दीपम की परंपरा जारी रहे और दीप स्तंभ पर दीपक जलाए जा सकें, क्योंकि यह कई वर्षों से चली आ रही धार्मिक प्रथा है। वहीं, कोर्ट ने यह भी जोर दिया कि धार्मिक परंपरा निभाते समय कानून-व्यवस्था और सामाजिक सामंजस्य सबसे अहम हैं। इसका मतलब है कि प्रशासन और सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई तनाव या विवाद न पैदा हो और सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान हो।

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