सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7:15 से दोपहर 12:50 तक – ज्ञान, कला और बसंत ऋतु के आगमन का ये पावन पर्व छात्रों-कलाकारों के लिए खास है!
बसंत पंचमी वो प्यारा त्योहार है, जो सर्दी की सारी थकान को झट से दूर कर देता है और बसंत की ताज़गी, रंग-बिरंगी खुशी लेकर आता है।
ये वो खास दिन है जब बसंत ऋतु की शुरुआत होती है। चारों तरफ सरसों के खेत पीले-पीले फूलों से खिल उठते हैं, हवा में ठंडक कम होकर एक सुकून भरी गर्माहट आ जाती है, और हर तरफ बस खुशी ही खुशी फैल जाती है। सबसे खूबसूरत बात यह है की इस दिन हम माँ सरस्वती की पूजा करते हैं – वो देवी जो हमें ज्ञान, विद्या, संगीत और कला का वरदान देती हैं। बस यही वजह है कि बसंत पंचमी सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि दिल और दिमाग दोनों को नई ऊर्जा देने वाला त्योहार है।
बसंत पंचमी कब है ?
इस साल बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। पंचमी तिथि 23 जनवरी की सुबह 2:28 बजे से शुरू होकर 24 जनवरी को 1:46 बजे तक रहेगी। तिथि के आधार पर अधिकांश स्थानों पर पूजा 23 जनवरी को ही की जाएगी। हालांकि कुछ क्षेत्रों में यह पर्व 24 जनवरी को भी मनाया जाएगा, लेकिन मुख्य तिथि के अनुसार 23 जनवरी ही मानी जा रही है। पूजा से पहले स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।
पूजा का शुभ मुहूर्त कब है?
पूजा का सबसे अच्छा और शुभ समय: सुबह 7:15 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक करीब 5-6 घंटे का है। ये दिन शुभ मुहूर्त माना जाता है – मतलब कोई भी शुभ काम जैसे पढ़ाई शुरू करना, नया बिजनेस, मुंडन, विवाह आदि बिना पंचांग देखे कर सकते हैं। लेकिन पूजा के लिए सुबह का समय सबसे बेहतर।
बसंत पंचमी का महत्व ये सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि नई शुरुआत का प्रतीक है।
• मां सरस्वती की जयंती मानी जाती है – वो ज्ञान, बुद्धि, वाणी, संगीत और कला की देवी हैं।
• छात्र-छात्राएं किताबें, पेन पूजते हैं, और अक्षरारंभ (हाथे खोड़ी) करते हैं – यानी बच्चे पहली बार अक्षर लिखना सीखते हैं।
• ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचते समय इसी दिन सरस्वती को प्रकट किया था, ताकि दुनिया में ज्ञान फैले।
• पीला रंग – सरसों के फूलों जैसा, बसंत का रंग – लोग पीले कपड़े पहनते हैं, पीले फूल, केसरिया खीर, बूंदी लड्डू चढ़ाते हैं।
• ये दिन शिक्षा, कला, संगीत और नई शुरुआत के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
कैसे मनाते हैं?
• सुबह स्नान कर पीले कपड़े पहनें।
• घर या स्कूल में मां सरस्वती की मूर्ति/तस्वीर रखें, सफेद लाल पीले फूल, अक्षत, चंदन, रोली चढ़ाएं।
• सरस्वती वंदना गाएं – “या कुन्देन्दु तुषारहार धवला…”
• किताबें, वाद्ययंत्र पूजें।
• प्रसाद में पीली चीजें जैसे केसरिया चावल, खीर, हलवा।
• बच्चे पतंग उड़ाते हैं (खासकर पंजाब में), और खुशी-खुशी मनाते हैं।
बंगाल में तो ये त्योहार भव्य मनाया जाता है पंडाल को बड़े ही सुंदर से सजाया जाता है और बच्चे पूजा करते हैं। उत्तर भारत में पीले कपड़े, पतंगबाजी होती है तो दक्षिण की ओर में श्री पंचमी कहते हैं।
यह भी पढ़े ; दिल छू लेने वाली कहानी , बेटी ने पूरा किया पिता का 50 साल पुराना सपना
