डॉ. के. ए. पॉल ने स्पीकर के फैसले के खिलाफ तेलंगाना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

डॉ. के. ए. पॉल ने स्पीकर के फैसले के खिलाफ तेलंगाना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

प्रजा शांति पार्टी प्रमुख डॉ. के. ए. पॉल ने दलबदल विरोधी कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए स्पीकर के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी और संवैधानिक जवाबदेही पर सवाल उठाए।

नई दिल्ली | गुरुवार, 18 दिसंबर 2025

प्रजा शांति पार्टी के अध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय मानवतावादी डॉ. के. ए. पॉल ने तेलंगाना विधानसभा स्पीकर द्वारा दलबदल मामलों में दिए गए आदेश को चुनौती देते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस मुद्दे पर उन्होंने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित आंध्र भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

डॉ. पॉल ने कहा कि बुधवार को विधानसभा स्पीकर गद्दम प्रसाद कुमार द्वारा भारत राष्ट्र समिति (BRS) के विधायकों से जुड़े अयोग्यता मामलों को खारिज करना संविधान की दसवीं अनुसूची में निहित दलबदल विरोधी कानून की भावना के खिलाफ है। स्पीकर ने अपने आदेश में यह कहते हुए याचिकाएं खारिज कर दी थीं कि पार्टी बदलने के ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, जिससे बीआरएस के पांच विधायकों—अरेकटपुडी गांधी, तेल्लम वेंकट राव, बांदा कृष्णमोहन, टी. प्रकाश गौड़ और गुडेम महिपाल रेड्डी—को राहत मिली।

प्रेस वार्ता में डॉ. पॉल ने आरोप लगाया कि स्पीकर ने विधायकों की सार्वजनिक गतिविधियों और राजनीतिक आचरण की अनदेखी करते हुए दलबदल को महज एक तकनीकी मुद्दा मान लिया, जो कानून की मूल भावना के विपरीत है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से जुड़ी कार्यवाही का भी उल्लेख किया। डॉ. पॉल के अनुसार, जब दलबदल से संबंधित याचिकाएं न्यायिक समीक्षा के अधीन थीं, उसी दौरान स्पीकर ने यह फैसला सुनाया। उन्होंने याद दिलाया कि 31 जुलाई को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पीकर को 10 विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर तीन महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद समयसीमा का पालन न होने पर 17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इसे “अत्यंत गंभीर अवमानना” बताते हुए नोटिस जारी किया था।

डॉ. पॉल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना कर पारित किया गया कोई भी आदेश संवैधानिक वैधता और संस्थागत जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पीकर संविधान और शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर काम करने के लिए बाध्य हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि स्पीकर के समक्ष अभी कई मामले लंबित हैं, जिनमें दानम नागेंद्र और कादियम श्रीहरि से जुड़े मामले भी शामिल हैं, जिन पर लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के समर्थन और प्रचार के आरोप लगे हैं।

डॉ. पॉल ने कहा कि उनकी याचिका में 2023 के विधानसभा चुनाव में बीआरएस के टिकट पर चुने गए उन सभी 10 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई है, जिन पर 2024 में कांग्रेस में शामिल होने के आरोप हैं। साथ ही उन्होंने स्पीकर से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी दोहराई।

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