क्या बेटियां शिक्षा में रच रही हैं नया इतिहास? मध्य प्रदेश बोर्ड रिजल्ट में छात्राओं का दबदबा

क्या बेटियां शिक्षा में रच रही हैं नया इतिहास? मध्य प्रदेश बोर्ड रिजल्ट में छात्राओं का दबदबा

छात्राओं ने 10वीं और 12वीं दोनों परीक्षाओं में मारी बाजी, मध्य प्रदेश बोर्ड रिजल्ट में सरकारी स्कूल भी रहे आगे

6 मई 2025, नई दिल्ली

मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने सोमवार को 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे घोषित कर दिए। इस वर्ष का परिणाम राज्य के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक रहा—छात्राओं ने न केवल मेरिट लिस्ट में दबदबा बनाया बल्कि शत-प्रतिशत अंक लाकर शैक्षणिक उपलब्धियों का नया मानक भी स्थापित किया। 10वीं में सिंगरौली की प्रज्ञा जयसवाल ने 500 में से 500 अंक हासिल कर राज्य टॉपर बनीं, वहीं 12वीं में सतना की प्रियल द्विवेदी ने 500 में से 492 अंक प्राप्त कर पहला स्थान पाया।

इस बार 10वीं में कुल 76.22% और 12वीं में 74.48% विद्यार्थी सफल रहे हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में क्रमशः 18.12% और 10% अधिक है। इस तरह 2025 का रिजल्ट पिछले 15 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ने में सफल रहा। सबसे खास बात यह रही कि दोनों ही कक्षाओं की मेरिट लिस्ट में छात्राओं की संख्या छात्रों से कहीं अधिक रही। 10वीं की 212 नामों की टॉपर सूची में 144 छात्राएं शामिल रहीं, जबकि 12वीं की 159 टॉपरों में 89 छात्राएं रहीं। यह स्पष्ट करता है कि बेटियां राज्य की शिक्षा व्यवस्था में नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं।

परिणामों की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की, जिनके साथ स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ‘लाड़ली लक्ष्मी’ और ‘लाड़ली बहना’ जैसी योजनाओं ने बेटियों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित किया है और आज के नतीजे इस बदलाव के प्रमाण हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस बार निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। नरसिंहपुर, नीमच और मंडला जिलों में सर्वाधिक उत्तीर्णता दर दर्ज की गई, जहां सरकारी विद्यालयों ने उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया।

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जो छात्र इस परीक्षा में सफल नहीं हो सके हैं, उनके लिए सरकार ने विशेष व्यवस्था की है। ऐसे छात्र 17 जून से आयोजित होने वाली दोबारा परीक्षा में भाग ले सकते हैं। इसके अलावा जो छात्र अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं, उन्हें भी यह अवसर प्रदान किया जाएगा।

यह साल न केवल परीक्षा परिणामों के आंकड़ों में वृद्धि का है, बल्कि यह उस सामाजिक बदलाव का भी संकेत है, जहां बेटियां अब शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं और सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में निरंतर सुधार देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश के लिए यह एक प्रेरणादायक क्षण है जो दिखाता है कि सही नीति, मार्गदर्शन और समर्पण से शिक्षा की तस्वीर बदली जा सकती है।

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