विजय रूपाणी: म्यांमार से राजकोट तक, एक साधारण जीवन से गुजरात के मुख्यमंत्री बनने की प्रेरक यात्रा

विजय रूपाणी: म्यांमार से राजकोट तक, एक साधारण जीवन से गुजरात के मुख्यमंत्री बनने की प्रेरक यात्रा

संघर्ष, सेवा और समर्पण से सजी विजय रूपाणी की कहानी, जिन्होंने आपातकाल से लेकर मुख्यमंत्री पद तक भारतीय राजनीति में निभाई अहम भूमिका

12 जून 2025, नई दिल्ली

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का जीवन भारतीय राजनीति में एक प्रेरक और अनुकरणीय यात्रा का प्रतीक है। एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने गुजरात के 16वें मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया, जिसमें जनसेवा, प्रतिबद्धता और संगठनात्मक क्षमता की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

विजय रूपाणी का जन्म 2 अगस्त 1956 को म्यांमार (तत्कालीन बर्मा) के येनगोन शहर में हुआ था। वे रमणिकलाल रूपाणी और मायाबेन के सात बच्चों में सबसे छोटे थे। उनके पिता वहां व्यापार के सिलसिले में बसे थे। 1960 में म्यांमार में हुए राजनीतिक अस्थिरता के चलते उनका परिवार भारत लौट आया और गुजरात के राजकोट में बस गया।

राजकोट में पले-बढ़े रूपाणी ने सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी से बीए और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन में ही वे राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित होकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़ गए और 1971 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य बने।

आपातकाल (1975-77) के दौरान उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाई और 11 महीने जेल में भी बिताए। यह संघर्ष उनके राजनीतिक जीवन की नींव बना।

राजनीतिक सफर की शुरुआत और उभार


1996-97 में वे राजकोट नगर निगम के मेयर बने, जिससे उनके राजनीतिक कॅरियर को रफ्तार मिली। 1998 में वे गुजरात भाजपा के प्रदेश सचिव बने और 2006 में गुजरात पर्यटन निगम के चेयरमैन बनाए गए। इसी वर्ष वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2012 तक उच्च सदन में गुजरात का प्रतिनिधित्व किया।

2013 में उन्हें गुजरात म्यूनिसिपल फाइनेंस बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया। इसके एक वर्ष बाद, 2014 में उन्होंने राजकोट पश्चिम विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने और आनंदीबेन पटेल सरकार में परिवहन मंत्री बने।

मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल


2016 में उन्हें गुजरात भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उसी वर्ष, 7 अगस्त को विजय रूपाणी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनके नेतृत्व में जीत हासिल की और वे दोबारा मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 2021 तक इस पद को संभाला। उनके कार्यकाल को स्थिरता, शांत नेतृत्व शैली और प्रशासनिक संतुलन के लिए जाना गया।

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व्यक्तिगत जीवन


विजय रूपाणी का विवाह भाजपा महिला मोर्चा की सदस्य अंजली रूपाणी से हुआ। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। एक बेटे का दुखद निधन कार दुर्घटना में हो गया था। उनकी बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि बेटा इंजीनियर है।

विजय रूपाणी की जीवन यात्रा भारतीय राजनीति में उस संघर्षशील नेतृत्व की मिसाल है, जो विनम्र शुरुआत से देश और समाज के उच्चतम पदों तक पहुंचता है। उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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