भारत में शतरंज पुनर्जागरण के अग्रदूत झुंझुनवाला से भेंट कर युवा खिलाड़ियों ने साझा किया अनुभव, सराहा उनका योगदान
9 जून 2025, नई दिल्ली
भारत की समृद्ध शतरंज परंपरा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले उद्योगपति और सामाजिक कार्यकर्ता श्री एल.एन. झुंझुनवाला से राजस्थान के तीन फीडे रेटेड युवा शतरंज खिलाड़ियों — आलोकिक माहेश्वरी, आराध्या उपाध्याय और हार्दिक शाह — ने 9 जून को उनके नई दिल्ली स्थित निवास पर सौजन्य भेंट की। इनके साथ उनके कोच श्री प्रकाश पाराशर भी उपस्थित रहे।
यह भेंट ऐसे समय हुई जब इन खिलाड़ियों ने छतरपुर के टिवोली गार्डन्स में आयोजित दिल्ली इंटरनेशनल ओपन ग्रैंडमास्टर्स शतरंज टूर्नामेंट में शानदार भागीदारी की। ये तीनों खिलाड़ी राजस्थान के हुरड़ा स्थित विवेकानंद केंद्र विद्यालय के छात्र हैं — जो श्री झुंझुनवाला द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित चार विद्यालयों में से एक है।
इस मुलाकात में खिलाड़ियों को श्री झुंझुनवाला से शतरंज और जीवन के अन्य क्षेत्रों में मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि शतरंज केवल एक खेल नहीं बल्कि जीवन के जरूरी मूल्यों — जैसे रणनीतिक सोच, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता — को विकसित करने का माध्यम है।
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श्री झुंझुनवाला ने 1973 में ‘नेशनल चेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ की स्थापना कर भारत में शतरंज के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया। उनके प्रयासों से भारत में पहला ग्रैंडमास्टर्स टूर्नामेंट 1982 में हुआ, जिससे भारत की वैश्विक स्थिति को नया आयाम मिला। साथ ही उन्होंने ‘बॉटविनिक शतरंज अकादमी’ की स्थापना की, जहां विश्वनाथन आनंद और अभिजीत गुप्ता जैसे नामचीन खिलाड़ी प्रशिक्षित हुए।
उनका योगदान केवल शतरंज तक सीमित नहीं रहा। कराटे, तीरंदाजी, निशानेबाजी, योग और एथलेटिक्स जैसे खेलों को भी उन्होंने बराबर प्रोत्साहित किया। उन्होंने भारत की पहली शतरंज पत्रिका ‘चेस इंडिया’ की शुरुआत कर शतरंज को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई।
