राज्यसभा में ‘वंदे मातरम्’ की गूंज, टीडीपी सांसद चिंतकायला विजय ने भारत की सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता का रखा पक्ष

राज्यसभा में ‘वंदे मातरम्’ की गूंज, टीडीपी सांसद चिंतकायला विजय ने भारत की सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता का रखा पक्ष

स्वतंत्रता आंदोलन के अमर नायकों को टीडीपी सांसद का नमन, अल्लूरी सीताराम राजू के साहस और बलिदान से राष्ट्रीय एकता का किया आह्वान

नई दिल्ली: तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के राज्यसभा सांसद चिंतकायला विजय ने शपथ ग्रहण के दौरान जीआई-टैग प्राप्त मंगलगिरि हैंडलूम शॉल ओढ़कर आंध्र प्रदेश के लगभग 5,000 बुनकर परिवारों को सम्मानित किया था। संसद के मानसून सत्र में दिए गए उनके ओजस्वी संबोधन ने एक बार फिर उन्हें राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया। इतिहास और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण उनके भाषण में ‘वंदे मातरम्’ भारत की सभ्यतागत पहचान, स्वतंत्रता संग्राम की विरासत और राष्ट्रीय एकता के संदेश का सशक्त माध्यम बनकर उभरा।

राज्यसभा में अपने पहले संबोधन के दौरान टीडीपी सांसद चिंतकायला विजय ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक उद्घोष नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के उन अमर बलिदानों की पहचान है, जिन्होंने भारत को एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

उन्होंने सदन में कहा, “भारत हमारी लोकतांत्रिक चेतना और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है। यह केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि त्याग, संस्कृति और सभ्यतागत मूल्यों की जीवंत विरासत है।”

अपने भाषण में विजय ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख किया और कहा कि यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति का सबसे प्रभावशाली प्रतीक बन गया था। उन्होंने खुदीराम बोस, वीर सावरकर और चंद्रशेखर आज़ाद के साहस और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उनका योगदान भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है।

उन्होंने कहा कि इन महान क्रांतिकारियों का जीवन आज भी राष्ट्रभक्ति, साहस और आत्मबल का जीवंत उदाहरण है।

अपने गृह राज्य आंध्र प्रदेश के महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि उनका अदम्य साहस आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें सम्मानित किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे राष्ट्रीय गौरव बताया।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख करते हुए विजय ने कहा कि राष्ट्रीय एकता और सामूहिक संकल्प ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।

अपने संबोधन के दौरान विजय ने कहा, “राष्ट्र की मजबूती तब बढ़ती है, जब समाज का हर वर्ग एकजुट होकर देश की प्रगति में योगदान देता है। विभाजन नहीं, बल्कि एकता ही विकास का आधार है।”

उन्होंने कहा कि यही भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और राष्ट्रीय चेतना की सबसे बड़ी पहचान है, जो विभिन्न विचारों के बावजूद देश को एकजुट बनाए रखती है।

विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय विमर्श में ‘वंदे मातरम्’ के महत्व को नई ऊर्जा प्रदान की है। साथ ही मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और मंत्री नारा लोकेश के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि वे आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति की नई पीढ़ी के प्रतिनिधि के रूप में उनका उद्देश्य केवल संसद में आवाज़ उठाना नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की आकांक्षाओं को राष्ट्रीय नीति से जोड़ना भी है। बुनकरों को सम्मान दिलाने और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को समकालीन विमर्श से जोड़ने की उनकी पहल इसी दिशा में एक प्रयास है।

समापन में विजय ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ आज भी भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय चेतना का सबसे प्रभावशाली प्रतीक बना हुआ है।

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