पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान-अमेरिका तनाव का असर अब सीधे वैश्विक बाजारों पर दिखने लगा है। आमतौर पर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी (Gold-Silver) की कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों के बीच बेचैनी बढ़ गई है।
Multi Commodity Exchange (MCX) पर सोना और चांदी दोनों में भारी गिरावट देखी गई। जून डिलीवरी वाला सोना करीब 5 प्रतिशत टूटकर ₹1,40,000 के आसपास पहुंच गया, जबकि चांदी में 6.2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई और इसका भाव ₹2,18,000 के करीब आ गया।
हालांकि यह गिरावट सिर्फ एक दिन की नहीं है। साल की शुरुआत में जहां सोना अपने ऊपरी स्तर पर था, वहीं अब यह करीब 20 प्रतिशत तक नीचे आ चुका है। चांदी की स्थिति और भी कमजोर रही है, जिसमें जनवरी के मुकाबले 40 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है।
क्यों गिर रहे हैं दाम?
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, बढ़ती महंगाई और केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीति ने बाजार का रुख बदल दिया है।
जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सोने-चांदी (Gold-Silver) जैसे बिना ब्याज वाले विकल्पों से हटकर बैंक डिपॉजिट और बॉन्ड जैसे साधनों की ओर झुकते हैं। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी बुलियन बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
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वैश्विक संकेत भी नकारात्मक
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखी गई है। स्पॉट गोल्ड और सिल्वर दोनों ही लाल निशान में रहे, जबकि प्लैटिनम और पैलेडियम जैसे धातुओं में भी कमजोरी दर्ज की गई।
ओवरसोल्ड बाजार में खरीदारी का मौका
तकनीकी संकेतों की बात करें तो बाजार फिलहाल ‘Oversold’ स्थिति में पहुंच गया है। इसका मतलब है कि कुछ निवेशक इसे खरीदारी का मौका भी मान रहे हैं। कई बड़े निवेशकों ने गिरावट के बीच भी अपनी पोजीशन बनाए रखी है, जिससे यह संकेत मिलता है कि लंबी अवधि में बाजार में फिर से तेजी आ सकती है।
तनाव से बढ़ी अस्थिरता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। दोनों देशों के बीच कड़े बयानों और संभावित कार्रवाई की आशंका ने बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है। खासकर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है।
भारतीय बाजार पर असर
भारत में कीमतों में गिरावट के बावजूद सोने-चांदी (Gold-Silver) की मांग बनी हुई है। शादी-विवाह के सीजन और त्योहारों के चलते लोग इस गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देख रहे हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए निवेश करते समय सावधानी जरूरी है।
आगे क्या?
बाजार की दिशा अब काफी हद तक वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगी। अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और ब्याज दरों को लेकर स्थिति स्पष्ट होती है, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। फिलहाल निवेशक सतर्क हैं और अगली बड़ी खबर का इंतजार कर रहे हैं, जो बाजार की दिशा तय करेगी।
