“सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि जो भी नियम या बदलाव लाए जाएँ, उनसे मज़दूरों का फायदा हो और उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिले। साथ ही, छोटे दुकानदारों को अपना व्यापार चलाने में आसानी हो और उन्हें फालतू की कागजी कार्रवाई से राहत मिले। उनके हित हमारे लिए सबसे ज़रूरी हैं।”
देश की राजधानी दिल्ली अब कभी नहीं सोएगी! मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने दिल्ली को एक नया रूप देने के लिए बहुत ही शानदार फैसला लिया है। अब शराब की दुकानों को छोड़कर, बाकी सभी तरह की दुकानें और बिज़नेस दिन-रात, 24 घंटे खुले रह सकते हैं। यह कदम दिल्ली की अर्थव्यवस्था और लोगों की ज़िंदगी, दोनों को रफ्तार देगा!
1. छोटे व्यापारियों को मिली ‘आज़ादी’ और कमाई का नया मौका
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस फैसले से दिल्ली की व्यापारिक गतिविधियों को बहुत बड़ा बूस्ट मिलेगा। बाज़ार में रहेगी रौनक 24×7 दुकानें खुली रहने का मतलब है कि बाज़ार में हमेशा चहल-पहल रहेगी, जिससे व्यापार को सीधा फायदा होगा। दुकानें ज़्यादा देर तक खुली रहेंगी, तो ज़्यादा कर्मचारियों की ज़रूरत होगी! यानी युवाओं के लिए नए रोज़गार के रास्ते खुलेंगे। अब होगी परेशानी खत्म छोटे व्यापारियों के लिए दुकान का रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) और रिन्यूअल (नवीनीकरण) करना भी बहुत आसान कर दिया गया है। कागज़ी काम का बोझ अब कम हो जाएगा।
2. आधी रात को काम करेंगी बेटियां: सुरक्षा की फुल गारंटी
यह फैसला खासकर महिलाओं के लिए एक बड़ा कदम है, जो अब नौकरी के लिए नाइट शिफ्ट भी कर सकेंगी। अब महिलाएं भी रात की नाइट शिफ्ट में काम कर पाएंगी, जिससे उनकी भागीदारी और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। गर्मियों में रात 9 बजे से सुबह 7 बजे तक, और सर्दियों में रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक। सबसे ज़रूरी बात! कंपनियों या दुकान मालिकों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं के लिए पूरी सुरक्षा, आने-जाने के लिए ट्रांसपोर्ट और अन्य सभी ज़रूरी सुविधाएँ दें।
3. ‘व्यापार में आसानी और श्रमिक सुरक्षा
सरकार ने इस कदम को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी ‘व्यापार करने में आसानी’ को बढ़ावा देने के लिए उठाया है, जिसका फायदा सीधा आम आदमी को मिलेगा। पुराने नियम होंगे खत्म दुकानों पर लगे बहुत सारे पुराने प्रतिबंध अब हटा दिए गए हैं। आसान श्रम कानून यह है की सरकार ने लेबर कोड (श्रम कानून) के प्रावधानों को भी सरल बनाया है, जिससे व्यापार करना आसान हो, और साथ ही श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर भी पूरा ध्यान दिया जा सके। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि यह निर्णय छोटे व्यापारियों और मेहनतकश लोगों के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है, ताकि दिल्ली एक ‘जागता और गतिशील’ व्यापारिक शहर बन सके।
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