मौसम का करवट बदलना: सीजन की पहली बर्फबारी ने तोड़ा लंबा सूखा
जम्मू-कश्मीर की खूबसूरती फिर से चमक उठी है! 21 दिसंबर से शुरू हुए चिल्लई-कलां के साथ ही घाटी में सीजन की पहली बर्फबारी ने दस्तक दे दी। पश्चिमी विक्षोभ की वजह से ऊपरी इलाकों में ताजा बर्फ गिरी, जबकि मैदानी हिस्सों में बारिश हुई। इसने महीनों के सूखे को खत्म कर दिया, जो घने कोहरे, स्मॉग और प्रदूषण का कारण बन रहा था।
उत्तर भारत के कई राज्यों में शीतलहर का अलर्ट है, लेकिन कश्मीर में ये बर्फ पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए खुशी की लहर लेकर आई।
गुलमर्ग में 5 से 9 इंच तक बर्फ जमी, सोनमर्ग में 3-4 इंच, जबकि साधना टॉप पर करीब 8 इंच बर्फ दर्ज की गई। पर्यटक इन नजारे को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए – कोई स्नोमैन बना रहा है, तो कोई गोंडोला राइड का मजा ले रहा। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने भी कहा कि ये बर्फबारी पर्यटन को नई जान डालेगी और क्रिसमस-न्यू ईयर की छुट्टियों में सैलानियों की कमाई में वृद्धि।
चिल्लई-कलां: कश्मीर की सबसे सख्त सर्दी का दौर
चिल्लई-कलां कश्मीर की सर्दियों का वो 40 दिन का दौर है, जो 21 दिसंबर से शुरू होकर 31 जनवरी तक चलता है। ये सबसे कड़ी ठंड का समय होता है, जब तापमान जमाव बिंदु से काफी नीचे चला जाता है। डल झील और दूसरे जलाशय जम जाते हैं, नलों में पानी फ्रीज हो जाता है। लेकिन ये बर्फ ‘स्थायी’ होती है – जल्दी नहीं पिघलती और पहाड़ों पर ग्लेशियर बनाकर साल भर पानी की सप्लाई तय करती है।
कश्मीरी लोग इसे सिर्फ मुश्किल नहीं मानते, बल्कि जश्न भी मनाते हैं। अच्छी बर्फबारी को फसल और पर्यावरण के लिए शुभ माना जाता है। इस दौरान लोग पारंपरिक फेरन (लंबा ऊनी गाउन) पहनते हैं और कांगड़ी (मिट्टी के बर्तन में जलते कोयले की टोकरी) का सहारा लेकर ठंड से लड़ते हैं। फेरन के अंदर कांगड़ी रखकर शरीर को गर्म रखना एक अनोखी परंपरा है!
आगे क्या? मौसम विभाग का पूर्वानुमान
मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में और बर्फबारी-बारिश की भविष्यवाणी की है, खासकर ऊंचे इलाकों में मध्यम से भारी बर्फ पड़ सकती है। मुगल रोड और कुछ हाईवे बंद हो गए हैं, फ्लाइट्स प्रभावित हुईं, लेकिन 30 दिसंबर तक बड़े विक्षोभ की संभावना कम है। सैलानियों से सलाह है कि सड़क यात्रा में सावधानी बरतें।
कश्मीर की ये सफेद बहार देखने का सबसे अच्छा समय यही है – अगर प्लान कर रहे हैं, तो जल्दी कीजिए, क्योंकि ये नजारा दिल चुरा लेगा!
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